भागवत कथा , भक्ति व कल्याण का सागर है

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बदलापुर। कस्बे के स्टेशन रोड पर स्थित भलुआही गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को वृंदावन धाम से पधारे पं. कृष्णकांत जी महराज ने कहा कि भागवत मनुष्य को भक्ति का मार्ग बताने वाला महाग्रंथ है।

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क व आत्मा का होता है वास

यह सिर्फ सुनने मात्र का ग्रंथ नहीं, बल्कि इसके प्रेरक प्रसंगों से जीवन को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने जब बन में तपस्या कर रहे ऋषि के गले में मृत सांप डाला तो ऋषि ने क्रोध में आकर परीक्षित को श्राप दिया कि सात दिन के भीतर उसकी मृत्यु हो जाएगी। उन सात दिनों में राजा परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण किया।

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भागवत मनुष्य को मोक्ष का मार्ग बताती है। उन्होंने कहा कि भागवत में भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग बताए गए हैं। जिनमें भक्तियोग, कर्मयोग व ज्ञान योग प्रमुख हैं। मनुष्य के लिए भक्तियोग सबसे उत्तम मार्ग बताया गया है। इससे पूर्व विधि विधान से भागवत महात्म्य का पूजन हुआ। जिसमें मुख्य यजमान उन्नत सिंह व आंनद सिंह रहे। इस अवसर पर बबलू सिंह, पिंटू तिवारी, राकेश तिवारी, वैभव सिंह, श्रवण तिवारी, अवनीश सिंह, आदि उपस्थित रहे।

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