सरकारी स्कूलों में राष्ट्र की भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों?

Teacher Sleeps In Class why

सवाल उठता है कि जब सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक और प्रिंसिपल ही नहीं बल्कि चपरासी भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को तैयार नहीं हैं तो दूसरे के बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में किस आधार पर कराने की बात करते हैं? यह शिक्षा के साथ मजाक के अतिरिक्त और कुछ नहीं कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को 15 फीसदी भी ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे है, जो चिंताजनक ही नहीं निराशाजनक भी है। ऐसे में अभिभावकों को इस बात की चिंता है कि सरकारी स्कूलों में उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

‘शिक्षक वह दीपक है, जो स्वयं जलकर समाज और शिष्य में ज्ञान रूपी प्रकाश की रोशनी देता है’ समाज के निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है । शिक्षक ही किसी भी राष्ट्र की दशा दिशा को निर्धारित करने वाला में अहम योगदान होता है। ‘शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, वह जीवन भर समाज को सही राह दिखाता है’। हिंदू संस्कृति ने गुरु फिर कहें शिक्षक को ईश्वर से ऊंच स्थान दिया गया है। महान समाज सुधारक एवं संत कबीरदास भी यही कहते हैं कि ‘गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय’। आचार्य चाणक्य कहते थे कि ‘शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं” । मेरे गाँव धारौली, जिला झज्जर में सरकारी स्कूल की दिवार पर लिखा हुआ वो वाक्य ‘देश का धन बैंकों में नहीं स्कूलों में है। आज के विद्यार्थी कल का भविष्य हैं’ मुझे (युद्धवीर सिंह लांबा) आज भी याद है”।

Female school teacher sleeping in class instead of teaching

सरकारी स्कूलों में दयनीय होती शिक्षा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सवाल यह है कि जब राज्य और केंद्र सरकारें शिक्षा के लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान कर रही हैं, फिर भी लोगों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग क्यों हो रहा है। प्रश्न यह भी है कि मध्यान्ह भोजन, स्कूल ड्रेस, साइकिल, पुस्तकें जैसी तमाम सुविधाएं मिलने के बाद भी सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या में बेतहाशा गिरावट क्यों हो रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए भले ही कवायद की जा रही है लेकिन सरकारी स्कूलों में हर साल बच्चों की दर्ज संख्या कम हो रही है। सरकारी स्कूलों से हजारों रुपए पगार लेने वाले शहरी क्षेत्र के 95 फीसदी शिक्षक ऐसे हैं, जिनके अपने बच्चे भी इन स्कूलों में नहीं पढ़ते हैं।

Female Teacher Sleeps In Class

एक सच्चाई यह भी है कि शिक्षकों की लेटलतीफी से बच्चों का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में प्राइमरी शिक्षकों के स्कूल में न जाने की शिकायतें इतनी बढ़ गई हैं कि अब उनके लिए “सेल्फी अटेंडेंस” जरूरी की गई है। तमाम शिक्षकों पर इल्ज़ाम है कि वे स्कूल नहीं जाते या अपनी जगह कम पैसे पर किसी और को पढ़ाने भेज देते हैं ।

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19 जुलाई 2019 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षक और कार्मिक स्कूल समय में मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। दरअसल, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाने में ध्यान देने के बजाय सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहने की शिकायतें शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा तक पहुंची । ऐसा देखने में आया है कि अधिकांश शिक्षक मोबाइल लेकर कक्षाओं में अध्यापन कार्य कराते है, जिससे बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते है। बीच-बीच में मैसेज आदि देखने के कारण शिक्षकों का ध्यान मोबाइल पर अधिक और बच्चों पर कम होता है।

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2017 में नीति आयोग का मानना था कि देश में पढ़ाई-लिखाई के लिहाज से खराब स्तर वाले सरकारी स्कूलों को निजी हाथों को सौंप दिया जाना चाहिए । आयोग ने कहा कि शिक्षकों की गैरहाजिरी की ऊंची दर, शिक्षकों के क्लास में रहने के दौरान पढ़ाई पर पर्याप्त समय नहीं देना और शिक्षा की खराब गुणवत्ता महत्वपूर्ण कारण हैं, जिसके कारण सरकारी स्कूलों में दाखिले कम हो रहे हैं और उनकी स्थिति खराब हुई है । निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों के नतीजे खराब हैं ।

teacher in telangana Sleeps In Class

दैनिक ट्रिब्यून में 21 जुलाई, 2019 को छपी खबर के अनुसार, हरियाणा सरकार ने प्रदेश में 66 और प्राइमरी सरकारी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। इनके अलावा 106 और प्राइमरी स्कूल अभी सरकार के टारगेट पर हैं, जिनमे विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम हैं जिन्हें बंद किया जाएगा। मौजूदा हरियाणा सरकार अपने अब तक के कार्यकाल में 173 प्राइमरी स्कूलों को बंद कर चुकी है। पूर्व की हुड्डा सरकार के दौरान कुल 415 प्राइमरी स्कूल इसी तर्ज पर बंद किए गए थे।

Teacher sleeping in class and future of studetns at stake

‘नवभारत टाइम्स’ में 22 जून 2019 को प्रकाशित ख़बर के अनुसार, ओडिशा की सरकार ने निर्णय लिया कि वह राज्य के ऐसे 966 स्कूलों को बंद करेगी, जहां 10 से कम विद्यार्थी हैं। स्कूल और जन शिक्षा मंत्री समीर रंजन दास ने बताया, ‘जिन विद्यालयों में विद्यार्थी 10 से कम होंगे, उन्हें एक किलोमीटर के भीतर दूसरे विद्यालय में समायोजित किया जाएगा।

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अभिभावकों की अक्सर शिकायत रहती है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है, शिक्षक समय से स्कूल नहीं पहुंचते हैं। अधिकांश शिक्षक कक्षा में बैठकर छात्रों को पढ़ाने के बजाए मोबाइल चलाने में व्यस्त रहते हैं तो बहुत से शिक्षक कक्षा में छात्रों को पढ़ाने के बजाए कुर्सी पर खर्राटा भरते नजर आते हैं। सरकारी स्कूलों में कई शिक्षक स्कूल के समय स्मार्टफोन पर फेसबुक, वाट्सएप, ट्वीटर और यू-टयूब आदि सोशल साइट देखते रहते हैं या काल कर दूसरों से बात करते हैं।

Teacher Sleeps In Class .

आखिर शिक्षकों के बच्चे क्यों नहीं पढ़ते सरकारी स्कूलों में? गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले साल 18 अगस्त, 2015 को प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों, मंत्रियों वविधायकों के बच्चों के दाखिले सरकारी स्कूलों में कराने के आदेश दिए थे। मध्य प्रदेश के कटनी के जिलाधिकारी डॉ. पंकज जैन ने 2019 के मई महीने में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट में आयोजित हो रहे प्रशिक्षण में पहुंचकर जब शिक्षकों से पूछा कि ‘ऐसे कितने शिक्षक हैं जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा सकते हैं’? इस सवाल पर प्रशिक्षण में सन्नाटा खिंच गया और किसी ने हाथ नहीं उठाए।

Teacher Sleeps In Class while

सोनीपत के गोहाना के राजकीय कन्या स्कूल में जनवरी, 2019 को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतीश सोलंकी ने सक्षम योजना के अंतर्गत गोहाना ब्लॉक के शिक्षकों की मीटिंग में शिक्षकों से पूछा कि ‘कितने शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। मीटिंग में बैठे एक भी शिक्षक ने हाथ ऊपर नहीं उठाया’। 8 सितंबर, 2017 को सोनीपत के उपायुक्त के मकरंद पांडुरंग ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर और खराब रिजल्ट को लेकर गोहाना के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक में विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यो और शिक्षकों से पूछा कि ‘कितने शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं तो केवल आठ शिक्षकों ने हाथ खड़े किए’।

Teacher taking rest on table during exam

सरकारी विद्यालयों में खराब परिणाम और शैक्षिक गुणवत्ता में कमी के पीछे कहीं न कहीं शिक्षकों की लेटलतीफी और समर्पण भाव में कमी बड़ा कारण है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लेटलतीफी से निपटने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने होंगे क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस– सुंदरकाण्ड दोहा संख्या 57 में कहा है ‘भय बिनु होइ न प्रीति’।। इस दोहे का अर्थ यह है कि बिना भय के प्रीति नहीं होती। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की हाजिरी बॉयोमेट्रिक सिस्टम से ली जानी चहिए, इससे स्कूलों से नदारद रहने वाले शिक्षकों पर लगाम लगेगी।

yudhbir singh lamba

लेखक युद्धवीर सिंह लांबा, अकिडो कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, बहादुरगढ़ जिला झज्जर, हरियाणा में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत है ।

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